1962 के युद्धवीर पूर्व सैनिक रामनारायण पाठक को अंतिम विदाईरू कुशीनगर में बारिश के बावजूद उमड़ी भीड़ ने दी श्रद्धांजलि

दैनिक बुद्ध का संदेश
कुशीनगर। रविवार का दिन भावनाओं और देशभक्ति से ओतप्रोत रहा। 1962 के भारत-चीन युद्ध में वीरता का परिचय देने वाले पूर्व सैनिक रामनारायण पाठक को अंतिम विदाई देने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े। बारिश के बावजूद श्रद्धांजलि सभा में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसने यह साबित कर दिया कि सच्चे देशभक्तों की स्मृति कभी धूमिल नहीं होती। श्रद्धांजलि सभा का दृश्य ग्राम वासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने पाठक जी के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम नमन किया।युवाओं ने तिरंगेझंडे के साथ ष्भारत माता की जय और वीर शहीद अमर रहें के नारों से वातावरण को गूंजायमान कर दिया।बुजुर्गों ने पाठक जी के साहस और त्याग को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताया। देशभक्ति की मिसाल रामनारायण पाठक ने 1962 के युद्ध में अदम्य साहस दिखाकर राष्ट्र की रक्षा की थी। उनके जीवन का हर अध्याय देशभक्ति और सेवा की मिसाल रहा। अंतिम विदाई के अवसर पर लोगों ने कहा कि पाठक जी का बलिदान और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता रहेगा। अंतिम क्षणों में स्थानीय प्रशासन और सेना के प्रतिनिधियों ने उन्हें सैनिक सम्मान के साथ विदाई दी।भीड़ ने मौन धारण कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।परिवारजनों ने भावुक होकर कहा कि पाठक जी का जीवन उनके लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत रहेगा।कुशीनगर की इस श्रद्धांजलि सभा ने यह संदेश दिया कि सच्चे वीरों की स्मृति अमर होती है और उनका बलिदान राष्ट्र की आत्मा में सदैव जीवित रहता है।
