लोक संस्कृति और परंपराओं को घर-घर तक पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए करें संरक्षित-सत्येंद्र सिंह खरवार
दैनिक सत्ता मंत्र
सोनभद्र। जनजातीय समाज की समृद्ध लोक कला, संस्कृति, परंपरा और आस्था को सहेजने एवं नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से विकासखंड कोन के बागेसोती (जऊंवाजोत) में जनजाति संस्कृति महोत्सव (करमा पूजा) का आयोजन किया गया। पारंपरिक करमा गीतों और नृत्यों के बीच आयोजित महोत्सव में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने सहभागिता की।कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह खरवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ आसपास के क्षेत्रों से आए करीब 15 बैगा पुजारियों द्वारा करम डाड़ लाकर विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना कर किया गया। इसके बाद करीब 20 जनजातीय सांस्कृतिक टीमों ने बारी-बारी से पारंपरिक करमा गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए।मुख्य अतिथि सत्येंद्र सिंह खरवार ने कहा कि जनजातीय समाज की अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति यहां देखने को मिला उत्साह सांस्कृतिक जागरूकता का परिचायक है। बदलते परिवेश और पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी लोक संस्कृति, पूजा-पद्धति, परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत को मजबूत और संरक्षित करना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि करमा पूजा केवल एक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि इसकी परंपरा और सांस्कृतिक भावना घर-घर एवं जन-जन तक पहुंचे। नई पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े, तभी इस समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।र्यक्रम को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद तथा ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कोन शशांक मिश्र ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने जनजातीय समाज की लोक कला, परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया।कार्यक्रम का संचालन जयप्रकाश गोंड ने तथा अध्यक्षता नन्दलाल उरांव ने की। खंड विकास अधिकारी कोन दिनेश शुक्ला ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रांत संगठन मंत्री पंकज, रामलखन सिंह, रविंद्र सिंह, देवनारायण खरवार, शिवम मिश्रा, गुरुशंकर, हरिनाथ उरांव, मुन्ना धांगर, रामलाल चेरो, हीरेश द्विवेदी, प्रवीण शुक्ला, जितेंद्र सिंह, मनोज चौबे, मनोज दुबे सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग, क्षेत्रवासी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
