सोनभद्र

धान की फसल को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए नियमित निगरानी करें

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दैनिक बुद्ध का संदेश
सोनभद्र। जिला कृषि रक्षा अधिकारी वीरेन्द्र कुमार ने किसानों से धान की फसल की नियमित निगरानी करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि कीट अथवा रोग के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाकर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।उन्होंने बताया कि तना बेधक कीट के नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर पांच फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग करें। इसके अलावा बाईफेनथिन 10 प्रतिशत ईसी 500 मिलीलीटर, कार्बाेफ्यूरान 3 जी 20 किलोग्राम, कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी 18 किलोग्राम, क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 150 मिलीलीटर अथवा फ्लुबेंडियामाइड 20 प्रतिशत डब्ल्यूजी 125 ग्राम में से किसी एक का निर्धारित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है।हरा, भूरा एवं सफेद फुदका के नियंत्रण के लिए एसिटामीप्रिड 20 प्रतिशत एसपी 100 ग्राम, कार्बाेफ्यूरान 3 जी 20 किलोग्राम, फिप्रोनिल 0.3 जी 20 किलोग्राम, इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत 125 मिलीलीटर, थायामेथोक्सैम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 100 ग्राम अथवा क्लोरपायरीफास 25 प्रतिशत ईसी 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर निर्धारित मात्रा में 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। शीथ ब्लाइट, झोंका रोग एवं भूरा धब्बा रोग के नियंत्रण के लिए अनुशंसित फफूंदनाशकों का निर्धारित मात्रा में 500-750 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने को कहा गया है। इनमें कार्बण्डाजिम, थायोफिनेट मिथाइल, हेक्साकोनाजोल, प्रोपीकोनाजोल, मैकोजेब तथा एजोक्सीस्ट्रोबिन $ डिफेनोकोनाजोल आदि रसायन शामिल हैं। जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी झुलसा के नियंत्रण के लिए स्ट्रैप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत $ टेट्रासाइक्लीन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत 15 ग्राम को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 500 ग्राम के साथ मिलाकर प्रति हेक्टेयर 500-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों से रसायनों का प्रयोग अनुशंसित मात्रा एवं विधि के अनुसार ही करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से आवश्यक सलाह प्राप्त करें।

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