पाली साहित्य में श्रावस्ती का महत्व विषय पर विमर्श व्याख्यान गोष्ठी आयोजित
दैनिक सत्ता मंत्र
श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ, भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के तत्वावधान में “पाली साहित्य में श्रावस्ती का महत्वकृएक विमर्श” विषय पर 17 अगस्त 2026 को चंद्रभान संस्कृत शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, तेंदुआ पंडित, कटरा, श्रावस्ती में भव्य विमर्श व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रीलंका मंदिर के मुख्य अतिथि आर. श्रद्धा लोक महाथेरो जी रहे। विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता के रूप में महामाया राजकीय पीजी कॉलेज, इकौना, श्रावस्ती के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने अपने विचार रखे। इसके अलावा डॉ. चार्य महाथेरो, न्यू बर्मा मंदिर श्रावस्ती, डॉ. नरपति महाथेरो, आसींद इंद्रसारा महाथेरो, भन्ते नगरत्न जी, डॉ. श्वेता मौर्य, पवन कुमार बौद्ध, प्रवीण कुमार बौद्ध, अशोक कुमार शाक्य तथा जयंत धर द्विवेदी सहित अन्य वक्ताओं ने पाली साहित्य में श्रावस्ती के ऐतिहासिक एवं बौद्ध साहित्यिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि श्रावस्ती भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख बौद्ध स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। पाली साहित्य में श्रावस्ती का उल्लेख अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों के साथ मिलता है। भगवान बुद्ध ने श्रावस्ती में लंबे समय तक प्रवास किया और यहीं से बौद्ध धर्म के उपदेशों एवं शिक्षाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। इसलिए पाली साहित्य के अध्ययन में श्रावस्ती का विशेष महत्व है। कार्यक्रम में संस्थान के प्रबंधक मुकेश चन्द्र जी, प्रधानाचार्या बबिता जी, संयोजक रविप्रताप गुप्ता जी के साथ जतिन चौधरी, करन शुक्ला, रजनीश द्विवेदी, ओंकार नाथ, वरदान शाक्य सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने श्रावस्ती की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं बौद्ध विरासत को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी को इसके गौरवशाली इतिहास से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य पाली साहित्य में वर्णित श्रावस्ती के महत्व को जनमानस एवं विद्यार्थियों तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने श्रावस्ती की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया।
