दो बार पकड़ा गया नकली शराब का नेटवर्क, जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर उठे सवाल -राजेश शर्मा
दैनिक सत्ता मंत्र
सिद्धार्थनगर। जिले में नकली अंग्रेजी शराब के संगठित नेटवर्क का लगातार दो बार भंडाफोड़ होने के बाद अब जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई में हजारों की संख्या में नकली ढक्कन, क्यूआर कोड, शराब की बोतलें और मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हो रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब नकली शराब तैयार करने और बाजार में खपाने का खेल लंबे समय से चल रहा था तो जिम्मेदार आबकारी विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?छह अगस्त को बांसी क्षेत्र में हुई कार्रवाई में पुलिस ने एक किराये के मकान से 32,472 नकली ढक्कन और 12,740 नकली बारकोड समेत अन्य सामग्री बरामद की थी। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में पुलिस को मुख्य सप्लायर के बारे में अहम जानकारी मिली।इसके महज कुछ दिनों बाद ही पुलिस ने 9 और 10 अगस्त की रात बांसी-डुमरियागंज मार्ग पर प्रतापपुर के पास एक बस से 35,740 नकली ढक्कन, 4,900 नकली क्यूआर कोड और 281 बोतल अंग्रेजी शराब समेत बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई ने पूरे नेटवर्क की जड़ें गहरी होने का संकेत दिया है।नकली शराब का यह खेल केवल शराब की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि असली बोतलों को खोलकर उनमें मिलावट करने, नकली ढक्कन और क्यूआर कोड लगाने के बाद उन्हें दोबारा बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही थी। इतनी बड़ी मात्रा में नकली सामग्री की बरामदगी यह बताती है कि नेटवर्क छोटे स्तर का नहीं था।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। जिले में शराब की दुकानों, लाइसेंसी विक्रेताओं और शराब की अवैध गतिविधियों पर निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। इसके बावजूद पुलिस को लगातार दो बार बड़ी मात्रा में नकली शराब बनाने की सामग्री पकड़नी पड़ी।पहली कार्रवाई के बाद पुलिस को मुख्य सप्लायर का नाम सामने आया और उसी सूचना के आधार पर दूसरी बड़ी कार्रवाई भी हो गई। इससे यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि यदि पुलिस को पूछताछ के दौरान नेटवर्क की इतनी महत्वपूर्ण कड़ियां मिल सकती हैं तो विभागीय स्तर पर नियमित जांच और निगरानी के दौरान यह गतिविधि क्यों नहीं पकड़ी गई?नकली क्यूआर कोड और ढक्कनों के जरिए शराब की बोतलों को असली दिखाकर बेचने की कोशिश न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि इससे शराब पीने वाले लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है। मिलावटी शराब में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा में गड़बड़ी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। बड़े नेटवर्क की जांच के साथ तय हो जिम्मेदारी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली ढक्कन और क्यूआर कोड कहां तैयार होते थे और नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। लेकिन इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि इस पूरे खेल के दौरान संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां कमजोर रही।लगातार दो बड़ी पुलिस कार्रवाई के बाद अब लोगों की निगाहें आबकारी विभाग की ओर हैं। सवाल केवल आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि यह भी है कि इतने बड़े नेटवर्क को समय रहते क्यों नहीं पकड़ा जा सका और इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? पुलिस की जांच के साथ विभागीय स्तर पर भी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होने की जरूरत महसूस की जा रही है।
