फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र प्रकरण में सीएमओ कार्यालय तक पहुंची जांच की आंच, मास्टरमाइंड की तलाश और नौकरी में इस्तेमाल की भी होगी पड़ताल
दैनिक सत्ता मंत्र
सिद्धार्थनगर। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ गई है। जिले का नाम सामने आने के बाद संबंधित कंप्यूटर सिस्टम को सील कर सुरक्षित रखा गया है। वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ल को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद संबंधित पटल के रजिस्टर और जारी किए गए प्रमाणपत्रों की जांच शुरू कर दी गई है।दिल्ली पुलिस की जांच में ललित कुमार उर्फ आदित्य को इस फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी बताया गया है। उसके कब्जे से 16 फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र मिलने की बात सामने आई है, जिनमें चार प्रमाणपत्र सिद्धार्थनगर से जारी बताए गए हैं। पूछताछ के आधार पर वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ल को सह-आरोपित बनाया गया है।जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ प्रमाणपत्र ऐसे लोगों के नाम से तैयार किए गए, जो मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित ही नहीं हुए थे। सिद्धार्थनगर से जारी चार प्रमाणपत्रों के संबंध में दिल्ली पुलिस ने सीएमओ कार्यालय से विस्तृत जानकारी मांगी है।विभागीय जानकारी के अनुसार दिव्यांगता प्रमाणपत्र के पटल पर हर महीने करीब 200 से 250 प्रमाणपत्र जारी होते हैं। ऐसे में पिछले वर्षों में जारी हजारों प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आ सकते हैं। विभाग रजिस्टर में दर्ज विवरण का प्रमाणपत्रों से मिलान कर रहा है।फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कितने लोगों ने नौकरी, प्रवेश या अन्य सरकारी लाभ लेने में किया। फिलहाल सिद्धार्थनगर से जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर कितने लोगों को नौकरी मिली, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। जांच आगे बढ़ने पर इसका खुलासा होने की उम्मीद है।डिप्टी सीएमओ डॉ. आरजी सिंह ने बताया कि रजिस्टर और प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। जांच टीम की ओर से मांगी जाने वाली जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
