सिद्धार्थनगर

रोस्टिंग के नाम पर बिजली कटौती से बेहाल खेसरहा, रात का चौन और बच्चों की पढ़ाई दोनों छिने

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दैनिक बुद्ध का संदेश
खेसरहा। रोस्टिंग के नाम पर हो रही बिजली कटौती ने खेसरहा क्षेत्र के ग्रामीणों की रातों की नींद और बच्चों की पढ़ाई दोनों छीन ली है। रात में करीब दो से ढाई घंटे तक बिजली गुल रहने से गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उस समय होती है, जब परिवार खाना बनाने और बच्चे पढ़ाई करने बैठते हैं। ठीक इसी वक्त बिजली कट जाने से घरों की पूरी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर के काम के बाद रात का समय परिवार के लिए सबसे जरूरी होता है, लेकिन बिजली कटौती ने इसी समय को सबसे मुश्किल बना दिया है। बिजली नहीं रहने से महिलाएं समय पर खाना नहीं बना पा रही हैं। अंधेरे और गर्मी के बीच घरेलू काम निपटाने में परेशानी होती है। वहीं पढ़ाई के लिए रात में मिलने वाला सीमित समय भी बिजली कटौती की भेंट चढ़ जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल से लौटने के बाद बच्चे रात में ही पढ़ाई करते हैं, लेकिन जब दो-दो घंटे बिजली गायब रहती है तो उनकी पढ़ाई अधूरी रह जाती है। परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए यह कटौती और भी बड़ी परेशानी बन गई है। बिजली आने का इंतजार करते-करते कई बार बच्चे सो जाते हैं। उधर, रात में बिजली गुल रहने से लोगों की नींद भी प्रभावित हो रही है। उमस और गर्मी के बीच पंखे बंद हो जाने से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग परेशान रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती अब महज कुछ घंटों की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर घर की रसोई से लेकर बच्चों की पढ़ाई और लोगों की नींद तक पहुंच गया है।ग्रामीण आमिर खान, कृष्णदेव मिश्रा, ए.के. पाल, शिवशंकर मिश्रा, हरीशचंद्र यादव, जावेद अहमद, जुनेद अली, नसीम खान, राधेश्याम गुप्ता समेत अन्य ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रोस्टिंग के नाम पर रात में लगातार कटौती से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक बिजली कटौती की मार आम लोगों को ही झेलनी पड़ेगी? ग्रामीणों ने बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि रोस्टिंग की व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाए और खासकर रात के समय होने वाली लंबी कटौती से लोगों को राहत दी जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई, परिवार की रसोई और बुजुर्गों की नींद बिजली कटौती की वजह से प्रभावित न हो।

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