818 आशाओं ने एक महीने में नहीं कराया एक भी संस्थागत प्रसव, विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण
दैनिक सत्ता मंत्र
सिद्धार्थनगर। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में बड़ा खुलासा हुआ है। मई माह में 818 आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन शून्य पाया गया। इन आशाओं ने पूरे महीने एक भी संस्थागत प्रसव नहीं कराया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित आशा कार्यकर्ताओं से स्पष्टीकरण तलब कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।जिले में कुल 2,851 आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इनमें से करीब 29 प्रतिशत आशाओं का मई माह में संस्थागत प्रसव का रिकॉर्ड शून्य रहा। सरकार संस्थागत प्रसव को मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने की प्रमुख योजना मानती है और इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।सबसे खराब स्थिति भनवापुर और मिठवल ब्लॉक में सामने आई। भनवापुर की 282 आशाओं में 104 तथा मिठवल की 244 आशाओं में 135 आशाओं ने पूरे महीने एक भी संस्थागत प्रसव नहीं कराया। वहीं, बांसी ब्लॉक में केवल तीन आशाओं का प्रदर्शन शून्य रहा।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी गर्भवती महिलाओं की पहचान, प्रसवपूर्व जांच, टीकाकरण, पोषण संबंधी परामर्श, सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित कराने और प्रसव के बाद मां एवं नवजात की नियमित निगरानी करना है।विभाग का कहना है कि सभी संबंधित आशाओं से जवाब मांगा गया है। संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
