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15 साल से बंद पड़े पीएचसी के आवासीय भवन खंडहर में तब्दील, करोड़ों की सरकारी संपत्ति हो रही बर्बाद

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दैनिक सत्ता मंत्र
खेसरहा। खेसरहा विकासखंड के सकारपार स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) टिकुर परिसर में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए करीब 15 वर्ष पूर्व बनाए गए आवासीय भवन आज भी उपयोग के अभाव में खंडहर बनते जा रहे हैं। लंबे समय से रखरखाव न होने के कारण भवनों की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं और पूरे परिसर में झाड़-झंखाड़ व घास-फूस उग आने से बदहाली साफ दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र का मुख्य भवन तो संचालित हो रहा है, लेकिन आवासीय भवन वर्षों से बंद पड़े हैं। परिसर में नियमित साफ-सफाई और देखरेख के अभाव में सरकारी संपत्ति लगातार क्षतिग्रस्त होती जा रही है। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। कोविड-19 महामारी के दौरान परिसर में अलग से कोविड भवन का निर्माण कराया गया था, लेकिन निर्माण के बाद न तो उसका नियमित उपयोग किया गया और न ही उसे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह संचालित किया गया। अब वह भवन भी उपेक्षा का शिकार होकर जर्जर होने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से बने इन भवनों का उपयोग न होना सरकारी धन की बर्बादी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि पुराने आवासीय भवनों की मरम्मत संभव है तो उन्हें तत्काल दुरुस्त कर स्वास्थ्यकर्मियों को आवंटित किया जाए। यदि भवन उपयोग योग्य नहीं हैं तो नए भवनों का निर्माण कराया जाए, ताकि स्वास्थ्यकर्मियों को आवास की सुविधा मिल सके और सरकारी संपत्ति का सही उपयोग हो। इस संबंध में पीएचसी के फार्मासिस्ट मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आवासीय भवन लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं। परिसर की साफ-सफाई समय-समय पर कराई जाती है तथा भवनों की मरम्मत एवं उपयोग से संबंधित विषय उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जा सकता है। अब सवाल यह है कि स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बनाए गए ये आवास और कोविड भवन आखिर कब तक बंद पड़े रहेंगे और इन्हें उपयोग में कब लाया जाएगा।

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